विधवा विवाह

विधवा विवाह | मध्यकाल में कई कुप्रथाएँ प्रचलित थी, जिनमें से एक प्रमुख प्रथा बंधुआ मजदूरी थी. 1856 ई. में विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित कर इसे वैद्यता प्रदान की

विधवा विवाह

पति की मृत्यु होने पर उसकी पत्नी विधवा कहलाती थी। उस समय बाल विवाह एवं बहुविवाह का अधिक प्रचलन था। अत: किशोर अवस्था में ही बालिकाएं विधवा हो जाती थी, जिन्हें नारकीय जीवन जीना पड़ता था। आधुनिक भारत में ईश्वर चन्द्र विद्यासागर के अथक प्रयासों से लार्ड डलहौजी ने 1856 ई. में विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित कर इसे वैद्यता प्रदान की।

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विधवा विवाह FAQ

Q 1. भारत में विधवा पुनर्विवाह अधिनियम किसके प्रयासों पारित किया गया था?

Ans – भारत में ईश्वर चन्द्र विद्यासागर के अथक प्रयासों से विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित किया गया था.

Q 2. भारत में विधवा पुनर्विवाह अधिनियम कब पारित किया गया था?

Ans – आधुनिक भारत में 1856 ई. में विधवा पुनर्विवाह अधिनियम पारित किया गया था.

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