हम्मीर देव चौहान का मूल्यांकन

हम्मीर देव चौहान का मूल्यांकन | हम्मीर के साथ रणथम्भौर के चौहानों का राज्य समाप्त हो गया और दुर्ग दिल्ली सल्तनत का भाग बन गया। उसने “न्याय की छतरी” का निर्माण भी करवाया था

हम्मीर देव चौहान का मूल्यांकन

हम्मीर के साथ रणथम्भौर के चौहानों का राज्य समाप्त हो गया और दुर्ग दिल्ली सल्तनत का भाग बन गया। इस बात को नहीं भूल सकते कि अलाउद्दीन द्वारा रणथम्भौर के आक्रमण में मंगोलों को शरण देना मुख्य कारण नहीं था। हम्मीर का उन्हें शरण देना कोई राजनीतिक भूल न थी, वरन् एक कर्त्तव्यपरायणता थी। राजस्थान के इतिहास में हम्मीर का सम्मान एक वीर योद्धा के रूप में ही नहीं है वरन् एक उदार शासक के रूप में है।

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वह शिव, विष्णु और महावीर के प्रति समान भाव से श्रद्धा रखता था। उसने कोटियज्ञ के सम्पादन के द्वारा अपनी धर्म निष्ठा का परिचय दिया जिससे उसे एक स्थायी प्रतिष्ठा प्राप्त हुई। विजयादित्य उसका सम्मानित दरबारी कवि तथा राघवदेव उसका गुरु था। भारतीय इतिहास में राणा हम्मीर देव चौहान अपने शरणागत वात्सल्य के उच्च कोटि के आदर्श के लिए जाने जाते रहेंगे. हम्मीर के बारे में प्रसिद्ध है “तिरिया-तेल, हम्मीर हठ, चढ़े न दूजो बार।”

हम्मीर देव चौहान का मूल्यांकन
हम्मीर देव चौहान का मूल्यांकन
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हम्मीर ने अपने पिता जयसिंह के 32 वर्षों के शासन की याद में रणथम्भौर दुर्ग में 32 खंभों की छतरी बनवाई जिसे न्याय की छतरी’ भी कहते हैं। हम्मीर देव ने अपनी पुत्री पदमला के नाम पर ‘पदमला तालाब’ का निर्माण करवाया। हम्मीर के दरबार में ‘बीजादित्य’ नामक कवि रहता था। डॉ. दशरथ शर्मा ने लिखा है कि “यदि उसमें कोई दोष भी थे तो वे उसके वीरोचित युद्ध, वंश प्रतिष्ठा की रक्षा तथा मंगोल शरणागतों की रक्षा के सामने नगण्य हो जाते हैं।”

नयनचन्द सूरी की रचना हम्मीर महाकाव्य, व्यास भाण्ड रचित हम्मीरायण, जोधराज रचित हम्मीर रासो अमृत कैलाश रचित ‘हम्मीर बंधन’ और चन्द्रशेखर द्वारा रचित ‘हम्मीर हठ’ नामक ग्रंथों की रचना इसी हम्मीर को नायक बनाकर की गई है।

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हम्मीर देव चौहान का मूल्यांकन FAQ

Q 1. हम्मी देव के गुरु का नाम क्या था?

Ans – हम्मीर देव के गुरु का नाम राघवदेव था.

Q 2. न्याय की छतरी का निर्माण किसने करवाया था?

Ans – न्याय की छतरी का निर्माण हम्मीर देव ने करवाया था.

Q 3. हम्मीर देव ने अपनी पुत्री पदमला के नाम पर किस तालाब का निर्माण करवाया था?

Ans – हम्मीर देव ने अपनी पुत्री पदमला के नाम पर ‘पदमला तालाब’ का निर्माण करवाया था.

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