पृथ्वीराज का परिवार

पृथ्वीराज का परिवार | पृथ्वीराज रासो और सिरोही के राजपुरोहित की पुस्तक की नंद में पृथ्वीराज के खास-खास विवाहों का उल्लेख है। देवड़ा चौहानों के बहुआ की पुस्तक में 16 रानियों का उल्लेख है

पृथ्वीराज का परिवार

पृथ्वीराज रासो और सिरोही के राजपुरोहित की पुस्तक की नंद में पृथ्वीराज के खास-खास विवाहों का उल्लेख है। देवड़ा चौहानों के बहुआ की पुस्तक में 16 रानियों का उल्लेख है। पृथ्वीराज के बलभद्र और भरत नाम के दो पुत्र थे और बहुआ की पुस्तक के अनुसार- 1. रयणसिंह, 2. सामंतसिंह, 3. बलभद्र व 4. भरत। इन चार पुत्रों का होना पाया जाता है। वंशभास्कर में 1. चंडासी उर्फ रतनसिंह (रयणसिंह) और सामंतसिंह का उल्लेख हुआ है। सुर्जनचरित्र में पृथ्वीराज के बाद ‘प्रल्हाद’ होना अंकित हुआ है। पृथ्वीराज के भाई हरिराज होना ऐतिहासिक प्रमाणों से मान्य हुआ है और पृथ्वीराज के पुत्र गोविन्दराज होने का भी कहा जाता है।

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पृथ्वीराज की बहिन पृथा देवी का विवाह चित्तौड़ के रावल समरसिंह के साथ होना पाया जाता है। सुर्जनचरित्र के अनुसार पृथ्वीराज के भाई माणकराज का वंशज रणथंभौर का ‘हमीर हठीला’ था उसी के वंशज बूंदी के हाड़ा बाघसिंह था।

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पृथ्वीराज के उत्तराधिकारी :

पृथ्वीराज को मारने के बाद शहाबुद्दीन गौरी ने पृथ्वीराज चौहान के अवयस्क पुत्र गोविन्दराज से विपुल कर राशि लेकर गोविंदराज को अजमेर की गद्दी पर बैठाया। गोविंदराज को अजमेर का राज्य सौंपने के बाद शहाबुद्दीन गौरी कुछ समय तक अजमेर में रहकर दिल्ली को लौट गया।

जब शहाबुद्दीन गौरी कुतबुद्दीन ऐबक को भारत में विजित क्षेत्रों का गवर्नर नियुक्त करके गजनी चला गया तब पृथ्वीराज चौहान के छोटे भाई हरिराज चौहान ने गोविन्दराज को अजमेर से मार भगाया तथा स्वयं अजमेर का राजा बन गया क्योंकि गोविंदराज ने मुसलमानों की अधीनता स्वीकार कर ली थी। इस कारण गोविंदराज अजमेर से रणथंभौर चला गया।

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ई. 1194 में हरिराज ने अपने सेनापति चतरराज को दिल्ली पर आक्रमण करने के लिये भेजा। कुतुबुद्दीन ऐबक ने चतरराज को परास्त कर दिया। 1195 में अजमेर पर फिर से मुसलमानों का अधिकार हो गया। कुतुबुद्दीन ऐबक ने हरिराज की मृत्यु के बाद अजमेर, गोविंदराज को न सौंपकर प्रत्यक्ष मुस्लिम शासन के अधीन ले लिया।

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पृथ्वीराज का परिवार FAQ

Q 1. शहाबुद्दीन गौरी ने पृथ्वीराज चौहान के किस पुत्र को अजमेर की गद्दी पर बैठाया?

Ans – शहाबुद्दीन गौरी ने पृथ्वीराज चौहान के अवयस्क पुत्र गोविन्दराज से विपुल कर राशि लेकर गोविंदराज को अजमेर की गद्दी पर बैठाया.

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