पर्युषण पर्व

पर्युषण पर्व | भारत में कई प्रकार के त्यौहार प्रचलित है, इनमें से एक दशलक्षण भी है. जैन धर्म में पर्युषण त्यौहार महापर्व कहलाता है। पर्युषण का शाब्दिक अर्थ है निकट बसना

पर्युषण पर्व

भारत में कई प्रकार के त्यौहार प्रचलित है, इनमें से एक दशलक्षण भी है. जैन धर्म में पर्युषण त्यौहार महापर्व कहलाता है।पर्युषण का शाब्दिक अर्थ है निकट बसना. दिगम्बर परम्परा में इस पर्व का नाम दशलक्षण के साथ जुड़ा हुआ है। जिसका प्रारंभ भाद्रपद सुदी पंचमी से होता है और समापन चतुर्दशी को श्वेताम्बर परम्परा में इस पर्व का प्रारम्भ भाद्रपद कृष्णा बारस से होता है व समापन भाद्रपद शुक्ला पंचमी को होता है।

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अंतिम दिन संवत्सरी पर्व मनाया जाता है। इसके दूसरे दिन अर्थात् आश्विन कृष्णा एकम को क्षमापणी पर्व मनाया जाता है तथा जैन समाज के सभी लोग आपस में अपनी गलतियों के लिए क्षमा याचना करते हैं। दिगंबर जैन समाज में पर्युषण पर्व के प्रथम दिन उत्तम क्षमा, दूसरे दिन उत्तम मार्दव, तीसरे दिन उत्तम आर्जव चौथे दिन उत्तम सत्य, पांचवे दिन उत्तम शौच, छठे दिन उत्तम संयम, सातवें दिन उत्तम तप, आठवें दिन उत्तम त्याग, नौवें दिन उत्तम आकिंचन, दसवें दिन ब्रह्मचर्य तथा अंतिम दिन क्षमावाणी के रूप में मनाया जाता है।

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पर्युषण पर्व FAQ

Q 1. जैन धर्म में पर्युषण त्यौहार क्या कहलाता है?

Ans – जैन धर्म में पर्युषण त्यौहार महापर्व कहलाता है।

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