महाराजा रणजीत सिंह – भरतपुर

महाराजा रणजीत सिंह | रणजीत सिंह भरतपुर रियासत के शासक व महाराजा नवल सिंह के उत्तराधिकारी थे. वे जीवन भर ब्रिटिश शासकों के मित्र रहे थे

महाराजा रणजीत सिंह – भरतपुर

रणजीत सिंह भरतपुर रियासत के शासक व महाराजा नवल सिंह के उत्तराधिकारी थे. वे जीवन भर ब्रिटिश शासकों के मित्र रहे थे. उन्होंने अंग्रेजों के साथ संधि का पूरी तरह से पालन किया था. महाराजा रणजीत सिंह के शासन काल में पहली बार 29 सितम्बर, 1803 में कम्पनी सरकार के प्रतिनिधि लार्ड लेक और भरतपुर रियासत के बीच ऐतिहासिक सन्धि हुई किन्तु 1804 ई. में रणजीत सिंह और कम्पनी सरकार के बीच ठन गई।

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इसके फलस्वरूप लाई लेक ने भरतपुर किले पर कब्जा जमाने के लिए भरतपुर व होल्कर की संयुक्त सेनाओं के बीच घमासान युद्ध हुआ और अन्ततः सन्धि हो गई। युद्ध के बाद किशनसिंह राजा बने।

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उनकी मृत्यु के बाद अप्रैल, 1929 को उनके पुत्र बृजेन्द्रसिंह को भरतपुर का महाराजा बनाया गया। इनके समय में भरतपुर राज्य का राजस्थान में एकीकरण हो गया।

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महाराजा रणजीत सिंह FAQ

Q 1. रणजीत सिंह किस रियासत के शासक थे?

Ans – रणजीत सिंह भरतपुर रियासत के शासक थे.  

Q 2. रणजीत सिंह किसके उत्तराधिकारी थे?

Ans – रणजीत सिंह महाराजा नवल सिंह के उत्तराधिकारी थे.

Q 3. रणजीत सिंह व ईस्ट इंडिया कंपनी के मध्य संधि कब हुई थी?

Ans – रणजीत सिंह व ईस्ट इंडिया कंपनी के मध्य संधि 29 सितम्बर, 1803 ई. को हुई थी.

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