महाराजा गंगासिंह

महाराजा गंगासिंह | महाराजा डूंगरसिंह ने अपने जीवन काल में ही अपने भाई गंगासिंह को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था। इनका जन्म 13 अक्टूबर 1880 ई. को हुआ था

महाराजा गंगासिंह

गंगा सिंह के पिता का नाम लाल सिंह था. वे बीकानेर के राठौड़ वंश के शासक थे. महाराजा डूंगरसिंह ने अपने जीवन काल में ही अपने भाई गंगासिंह को अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था। 1913 ई. में महाराजा गंगासिंह ने बीकानेर में नाममात्र के अधिकार देते हुए ‘प्रजा प्रतिनिधि सभा’ की स्थापना की। जो राजस्थान में विधानमण्डल की दिशा में उठाया गया पहला कदम था।

प्रथम विश्व युद्ध के बाद हुए ‘वर्साय’ के शांति सम्मेलन में महाराजा ने भाग लिया तथा वे वर्साय की शांति संधि के एक हस्ताक्षरकर्ता भी थे। महाराजा गंगासिंह ने लंदन से भारत लौटते समय रोम में एक नोट लिखा जो ‘रोम नोट’ के नाम से प्रसिद्ध है। उन्होंने 15 मई, 1917 को ऑस्टिन चेम्बरलेन को उस नोट को अग्रेषित किया। इसमें उन्होंने चेम्बरलेन से आग्रह किया कि उन्हें उदार, सहानुभूतिपूर्ण तथा प्रचूर पैमाने पर कदम उठाने चाहिए ताकि भारतीय ब्रिटिश साम्राज्य से बंधे।

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उस रोम नोट में महाराजा गंगासिंह ने चार बिंदु कार्यक्रम रखा जिसमें उन्होंने बल दिया कि साम्राज्य के भीतर भारत के लिए स्व-सरकार भारत में ब्रिटिश शासन का लक्ष्य हो। जुलाई 1918 के ऐतिहासिक और विवादास्पद मोंटग्यू-चेम्सफोर्ड घोषणा में भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित सुधारों को आंशिक रूप से बीकानेर महाराजा द्वारा लिखे गये रोम नोट की पृष्ठभूमि में देखा जाता है।

महाराजा गंगासिंह
महाराजा गंगासिंह
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इनके प्रयत्नों से ही 1921 ई. में नरेन्द्र मण्डल का गठन किया गया, जिसके 1921 से 1925 ई. तक ये चांसलर भी रहे। गंगासिंह ने बटलर समिति (1927 ई.) के समक्ष यह मांग की कि उनके संबंध भारतीय सरकार से न होकर इंग्लैण्ड के राजतंत्र के साथ माने जाए। गंगासिंह ने 1932 ई. में गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया एवं एक सर्वोच्च न्यायालय, वायसराय को परामर्श देने के लिए एक राज्य परिषद् और सामूहिक हितों के प्रश्नों के वर्गीकरण की शर्त रखी।

महाराजा गंगासिंह ने सन् 1927 में गंगनहर का निर्माण करवाया। इन्हें ‘राजपूताने का भागीरथ’ और ‘आधुनिक भारत का भागीरथ’ कहा जाता है। बीकानेर के अंतिम महाराजा शार्दुलसिंह थे जिन्होंने बीकानेर में मोसर, न्योत व तख्त नशीनी परम्पराओं को बंद करवा दिया।

महाराजा गंगा सिंह का देहांत 2 फरवरी 1943 ई. को हुआ था. इनके बाद में बीकानेर के शासक शार्दुलसिंह बने थे.

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महाराजा गंगासिंह FAQ

Q 1. गंगा सिंह के पिता का नाम क्या था?

Ans – गंगा सिंह के पिता का नाम लाल सिंह था.

Q 2. महाराजा गंगा सिंह ने गंगनहर का निर्माण कब करवाया था?

Ans – महाराजा गंगा सिंह ने सन् 1927 में गंगनहर का निर्माण करवाया था.

Q 3. महाराजा गंगा सिंह का देहांत कब हुआ था?

Ans – महाराजा गंगा सिंह का देहांत 2 फरवरी 1943 ई. को हुआ था.

Q 4. महाराजा गंगा सिंह के बाद में बीकानेर के शासक कौन बने थे?

Ans – महाराजा गंगा सिंह के बाद में बीकानेर के शासक शार्दुलसिंह बने थे.

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