कोटा के हाड़ा चौहान

कोटा के हाड़ा चौहान | कोटा पूर्व में कोटिया भील के नियंत्रण में था, कोटिया भील के कारण इसका नाम कोटा पड़ा। कोटा में ऐतिहासिक काल से आज तक कृष्ण भक्ति का प्रभाव रहा है। इसलिए कोटा का नाम ‘नन्दग्राम’ भी मिलता है

कोटा के हाड़ा चौहान

कोटा पूर्व में कोटिया भील के नियंत्रण में था, कोटिया भील के कारण इसका नाम कोटा पड़ा। उपलब्ध साक्ष्यों के अनुसार बूँदी के राजा समरसी के पुत्र जैतसी ने ईस्वी सन् 1264 में चंबल के पूर्वी किनारे पर कोटिया भील को मारकर इस भू-भाग को अपने अधिकार में ले लिया था और भील शासक के नाम पर इस स्थान का नाम कोटाह (कोटा) रखा।

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कोटा में ऐतिहासिक काल से आज तक कृष्ण भक्ति का प्रभाव रहा है। इसलिए कोटा का नाम ‘नन्दग्राम’ भी मिलता है।

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देवसिंह के पुत्र ‘समरसिंह’ ने कोटिया शाखा के भीलों से संघर्ष किया। उसने अपने लड़के जैत्रसिंह को नवविजित भाग, जो कोटा का भाग था, दे दिया। 1274 ई. में इस तरह हाड़ौती में कोटा एक राजधानी के रूप में बना, परन्तु वह बूँदी राज्य के अन्तर्गत था।

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कोटा के हाड़ा चौहान FAQ

Q 1. कोटा पूर्व में किसके नियंत्रण में था?

Ans – कोटा पूर्व में कोटिया भील के नियंत्रण में था.

Q 2. कोटा का नाम किसके नाम पर रखा गया था?
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Ans – कोटा का नाम कोटिया भील नाम पर रखा गया था.

Q 3. कोटा में ऐतिहासिक काल से आज तक किसकी भक्ति का प्रभाव रहा है?

Ans – कोटा में ऐतिहासिक काल से आज तक कृष्ण भक्ति का प्रभाव रहा है.

Q 4. आज तक कृष्ण भक्ति का प्रभाव के कारण कोटा का नाम क्या मिलता है?

Ans – आज तक कृष्ण भक्ति का प्रभाव के कारण कोटा का नाम नन्दग्राम मिलता है.

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