गुहिल राजवंश

गुहिल राजवंश | रावल समरसिंह की चित्तौड़ प्रशस्ति से गुहिल वंश की अनेक शाखाओं का बोध होता है। मुँहणौत नैणसी ने अपनी ख्यात में गुहिलों की 24 शाखाओं का जिक्र किया है

गुहिल राजवंश

रावल समरसिंह की चित्तौड़ प्रशस्ति से गुहिल वंश की अनेक शाखाओं का बोध होता है। मुँहणौत नैणसी ने अपनी ख्यात में गुहिलों की 24 शाखाओं का जिक्र किया है। कर्नल टॉड ने भी अपने गुरु ज्ञानचन्द्र के माण्डल के उपसार के संग्रहालय के आधार पर गृहिलों की 24 शाखाओं को माना है।

इनमें कल्याणपुर के गुहिल, वागड़ के गुहिल, चाटसू के गुहिल, मारवाड़ के गुहिल, घोड़ के गुहिल, काठियावाड़ के गुहिल, मेवाड़ के गुहिल आदि अधिक प्रसिद्ध हैं। यहाँ हम मेवाड़ और वागड़ के गुहिलों का संक्षिप्त अध्ययन करेंगे।

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गृहिलों की उत्पत्ति

अबुल फजल मेवाड़ के गुहिलों को ईरान के बादशाह नौशेरवां आदिल की सन्तान होना मानते हैं। डी.आर. भण्डारकर मेवाड़ के गुहिलों को ब्राह्मण वंश से मानते हैं। क्योंकि बापा के लिए ‘विप्र’ शब्द आया है। डॉ. गोपीनाथ शर्मा भी यही मानते हैं। मुँहणौत नैणसी इन्हें आदिरूप में ब्राह्मण एवं जानकारी से क्षत्रिय मानते हैं।

गुहिल राजवंश
गुहिल राजवंश
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डॉ. गोरीशंकर हीराचन्द ओझा इन्हें सूर्यवंशी मानते हैं। कर्नल जेम्स टॉड ने राजपूतों को विदेशियों की सन्तान मानने के पक्ष की पुष्टि में फारसी तवारीखों के वर्णन को ठीक माना और जैन ग्रंथों के आधार पर यह धारणा बनायी कि वल्लभी के शासक शिलादित्य के समय जो कनकसेन (144 ई.) के पीछे हुआ था, विदेशियों ने वल्लभी पर 524 ई. में आक्रमण कर उसे नष्ट कर दिया।

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उस समय शिलादित्य की रानी पुष्पावती जो गर्भवती थी, अम्बा भवानी की यात्रा पर गई हुई थी, ही बच पायी। उसी ने एक गुफा में एक बच्चे को जन्म दिया जो आगे चलकर मेवाड़ का स्वामी बना। गुफा में पैदा होने के कारण वह गोह, गुहिल, गुहदत्त कहलाया। इस वंश में सर्वप्रथम गुहिल के प्रतापी होने के कारण इस वंश के राजपूत जहां-जहां जाकर बसे उन्होंने अपने को गुहिल वंशीय कहा।

संस्कृत लेखों में इस वंश के लिए ‘गुहिल’, ‘गुहिलपुत्र’, ‘गोभिलपुत्र’ ‘गुहिलोत’ और ‘गुहिल्य’ शब्दों का प्रयोग किया गया है। भाषा में इन्हें ‘गुहिल’, ‘गोहिल’, ‘गहलोत’ और ‘गैहलोत’ कहते हैं। भाषा का गोहिल रूप संस्कृत के ‘गोभिल’ और ‘गोहिल्य’ से बना है।

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गुहिल राजवंश FAQ

Q 1. रावल समरसिंह की किस प्रशस्ति से गुहिल वंश की अनेक शाखाओं का बोध होता है?
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Ans – रावल समरसिंह की चित्तौड़ प्रशस्ति से गुहिल वंश की अनेक शाखाओं का बोध होता है.

Q 2. मुँहणौत नैणसी ने अपनी ख्यात में गुहिलों की कितनी शाखाओं का जिक्र किया है?

Ans – मुँहणौत नैणसी ने अपनी ख्यात में गुहिलों की 24 शाखाओं का जिक्र किया है.

Q 3. गुफा में पैदा होने के कारण रानी पुष्पावती का पुत्र क्या कहलाया था?

Ans – गुफा में पैदा होने के कारण रानी पुष्पावती का पुत्र गोह, गुहिल, गुहदत्त कहलाया था.

Q 4. अबुल फजल मेवाड़ के गुहिलों को किसकी सन्तान होना मानते हैं
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Ans – अबुल फजल मेवाड़ के गुहिलों को ईरान के बादशाह नौशेरवां आदिल की सन्तान होना मानते हैं.

Q 5. डी.आर. भण्डारकर मेवाड़ के गुहिलों को किस वंश से मानते हैं?

Ans – डी.आर. भण्डारकर मेवाड़ के गुहिलों को ब्राह्मण वंश से मानते हैं.

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