बदनसिंह जाट

बदनसिंह जाट | चूडामन के भतीजे और उत्तराधिकारी बदनसिंह को जयपुर नरेश सवाई जयसिंह ने डीग की जागीर दी एवं ‘ब्रजराज’ की उपाधि प्रदान की

बदनसिंह जाट

चूडामन के भतीजे और उत्तराधिकारी बदनसिंह को जयपुर नरेश सवाई जयसिंह ने डीग की जागीर दी एवं ‘ब्रजराज’ की उपाधि प्रदान की। बदनसिंह ने डीग, कुम्हेर, भरतपुर व बैर में नये दुर्ग बनवाये। आगरा व मथुरा पर अधिकार करके बदनसिंह ने भरतपुर के नये राजघराने की नींव डाली, जिसका क्षेत्र पहले से अधिक विस्तृत था।

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1723 ई. में बदनसिंह भरतपुर के राजा बने। उसने वृन्दावन में एक मंदिर, डीग के किले में कुछ सुन्दर महलों का निर्माण भी करवाया।

बदनसिंह के पुत्र सूरजमल ने सोधर के निकट दुर्ग का निर्माण करवाया जो बाद में भरतपुर के दुर्ग के नाम से प्रसिद्ध हुआ। बदनसिंह ने उसे अपनी राजधानी बनाया। इसने जीते जी अपने पुत्र सूरजमल को शासन की बागडोर सौंप दी।

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बदनसिंह जाट FAQ

Q 1. चूडामन का उत्तराधिकारी कौन था?

Ans – चूडामन का उत्तराधिकारी बदनसिंह था.

Q 2. बदनसिंह को जयपुर नरेश सवाई जयसिंह ने कहाँ की जागीर दी थी?

Ans – बदनसिंह को जयपुर नरेश सवाई जयसिंह ने डीग की जागीर दी थी.

Q 3. बदनसिंह को जयपुर नरेश सवाई जयसिंह ने किसकी उपाधि प्रदान की थी?

Ans – बदनसिंह को जयपुर नरेश सवाई जयसिंह ने ‘ब्रजराज’ की उपाधि प्रदान की थी.

Q 4. बदनसिंह भरतपुर के राजा कब बने थे?

Ans – बदनसिंह भरतपुर के राजा 1723 ई. में बने थे.

Q 5. बदनसिंह का उत्तराधिकारी कौन था?

Ans – बदनसिंह का उत्तराधिकारी सूरजमल था.

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